
चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चली आ रही आंतरिक कलह और गुटबाजी को खत्म करने के लिए प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल के प्रयास अब रंग लाते दिख रहे हैं। शनिवार को होने वाली एक महत्वपूर्ण बैठक में दोनों विरोधी गुटों के बीच औपचारिक सुलह की घोषणा होने की पूरी संभावना है, जहाँ दोनों पक्ष एक मंच पर एकजुटता प्रदर्शित कर सकते हैं। हालांकि, इस महत्वपूर्ण बैठक से ठीक कुछ घंटे पहले पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने मीडिया के माध्यम से कांग्रेस हाईकमान को एक बार फिर अपनी ताकत और दबाव का स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है।
इस पूरे विवाद की मुख्य जड़ तरनतारन उपचुनाव के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग द्वारा दिया गया एक बयान है। इस बयान के बाद वंचित और दलित वर्ग से जुड़े कई कांग्रेस नेता राजा वड़िंग के खिलाफ लामबंद हो गए और चन्नी गुट की नाराजगी खुलकर सामने आ गई।
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार पंजाब में करीब 34 प्रतिशत दलित आबादी है। इसी सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखते हुए चन्नी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री बूटा सिंह के परिवार से मुलाकात की, जिसके बाद बूटा सिंह के बेटे ने भी चन्नी का समर्थन करते हुए कांग्रेस आलाकमान से दलित भाईचारे को उचित प्रतिनिधित्व और मजबूती देने की वकालत की। चन्नी ने साफ कर दिया है कि वे कांग्रेस के भीतर रहकर ही अपने वर्ग के हक और सम्मान के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।
इस कलह को शांत करने और सुलह का रास्ता तैयार करने में लोकसभा सदस्य सुखजिंदर सिंह रंधावा और विधायक परगट सिंह मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। दिल्ली से वरिष्ठ नेताओं के फोन आने के बाद इन दोनों नेताओं ने सक्रियता बढ़ाई।
रंधावा ने कपूरथला के विधायक राणा गुरजीत सिंह से अपने पुराने मतभेदों को भुलाकर मुलाकात की और उन्हें इस समझौते में सहयोग के लिए राजी किया। इसी कड़ी में अब नाराज चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक नेता शनिवार को राणा गुरजीत सिंह के आवास पर पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल से मिलकर गतिरोध को पूरी तरह समाप्त करने के लिए तैयार हो गए हैं।














