Middle East Peace Deal: इजरायल और लेबनान के बीच ऐतिहासिक शांति समझौता! वॉशिंगटन में हुआ 14 सूत्रीय सीजफायर डील पर साइन; जानें समझौते की बड़ी बातें

वॉशिंगटन/बेरुत। मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में लंबे समय से जारी भीषण खूनी संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक कूटनीतिक सफलता हाथ लगी है। इजरायल और लेबनान के बीच ‘स्थायी शांति एवं सुरक्षा’ स्थापित करने के लिए शुक्रवार को वॉशिंगटन में एक ऐतिहासिक फ्रेमवर्क समझौते (शांति समझौते की रूपरेखा) पर हस्ताक्षर किए गए। अमेरिका की मध्यस्थता में कई दिनों तक चली बेहद गोपनीय और गहन बातचीत के बाद दोनों देश युद्धविराम (Ceasefire) पर सहमत हुए हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने इस ऐतिहासिक समझौते की औपचारिक घोषणा करते हुए इसका 14 पॉइंट का आधिकारिक मसौदा (Draft) भी जारी कर दिया है।

हिज्बुल्लाह का निरस्त्रीकरण और दक्षिणी लेबनान से वापसी मुख्य शर्त

अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा जारी 14 सूत्रीय समझौते के मसौदे में इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच जारी जंग को हमेशा के लिए रोकने का पूरा रोडमैप तैयार किया गया है। इस समझौते की सबसे प्रमुख बातें और शर्तें इस प्रकार हैं:

  • लेबनानी सेना का नियंत्रण: लेबनान की आधिकारिक और संप्रभु सेना अब पूरे देश (विशेषकर दक्षिणी लेबनान) में अपना पूर्ण नियंत्रण स्थापित करेगी।

  • हिज्बुल्लाह का निरस्त्रीकरण: हिज्बुल्लाह समेत लेबनान के भीतर सक्रिय सभी हथियारबंद समूहों को अपने घातक हथियार पूरी तरह सरेंडर (जमा) करने होंगे और अपने सैन्य ठिकाने वहां से हटाने होंगे।

  • इजरायली सेना की वापसी: हिज्बुल्लाह के पीछे हटने और हथियार जमा करने की शर्तों के पूरा होने के बाद, इजरायली सेना (IDF) लेबनान के कब्जे वाले क्षेत्रों से चरणबद्ध (Step-by-Step) तरीके से पूरी तरह बाहर निकल जाएगी।

  • सिक्योरिटी एनेक्स: इस पूरी प्रक्रिया को सुचारू रूप से लागू करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका (US) के पूर्ण समर्थन से एक विशेष ‘सिक्योरिटी एनेक्स’ (सुरक्षा अनुलग्नक) तैयार किया गया है, जो इस पूरे फ्रेमवर्क की रीढ़ होगा।

‘रास्ता कठिन है, पर यह शुरुआत है’– अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो

समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि यह मिडिल ईस्ट में शांति और स्थिरता की दिशा में उठाया गया पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, उन्होंने दोनों पक्षों को आगाह करते हुए यह भी कहा कि इस समझौते की शर्तों को जमीन पर उतारना आगे भी काफी चुनौतीपूर्ण रहेगा। इस समझौते का मूल उद्देश्य दक्षिणी लेबनान में अंतरराष्ट्रीय नियमों को बहाल करना, लेबनानी सरकार की संप्रभुता को वापस लाना और हिज्बुल्लाह की सैन्य क्षमता को समाप्त करना है।

इजरायल और लेबनान के राजदूतों ने बताया ‘ऐतिहासिक कदम’

अमेरिका में लेबनान की राजदूत नदा हमादेह ने इस शांति पहल का पुरजोर स्वागत किया है और संघर्ष को टालने में शामिल सभी अंतरराष्ट्रीय नेताओं व मध्यस्थों का आभार जताया है। वहीं, दूसरी ओर अमेरिका में इजरायल के राजदूत येचिएल लेटर ने इस फ्रेमवर्क को क्षेत्रीय इतिहास का एक मील का पत्थर और ऐतिहासिक कदम करार दिया है।

वैश्विक रणनीतिकारों का मानना है कि इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच सीधे युद्ध को समाप्त करने की दिशा में यह अब तक का सबसे पहला और ठोस लिखित कदम है। हालांकि, अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि युद्ध की आग में झुलस रहे दोनों देश इस कागजी रूपरेखा को जमीनी धरातल पर कितनी ईमानदारी और तेजी से लागू करते हैं।

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