BRICS Summit 2026: गलवान झड़प के बाद पहली बार भारत पहुंचे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, पीएम मोदी संग महामुलाकात पर टिकीं दुनिया की नजरें

गलवान हिंसा के बाद पहला भारत दौरा

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार को 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत पहुंच रहे हैं। जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प और उसके बाद उपजे गंभीर सैन्य गतिरोध के बाद चीनी राष्ट्रपति का यह पहला भारत दौरा है। इससे पहले वह अक्टूबर 2019 में अनौपचारिक शिखर सम्मेलन के लिए महाबलिपुरम आए थे। वर्षों के तनाव और कूटनीतिक अविश्वास के बाद दोनों एशियाई महाशक्तियों के बीच यह यात्रा संबंधों को सामान्य बनाने और राजनीतिक-आर्थिक पुनर्समापन की एक बेहद महत्वपूर्ण परीक्षा मानी जा रही है।

एलएसी सीमा विवाद और दीर्घकालिक शांति पर मंथन

शनिवार शाम 6 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक अति-महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक होगी। इस बैठक का मुख्य केंद्र वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जारी सीमा विवाद रहेगा। हालांकि, अक्टूबर 2024 में पेट्रोलिंग व्यवस्था पर बनी सहमति के बाद दोनों देशों के रिश्तों में जमी बर्फ पिघलनी शुरू हुई थी, लेकिन यह वार्ता सीमा पर दीर्घकालिक शांति और स्थिरता स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के हालिया कदम

तनाव कम करने के लिए दोनों शीर्ष नेताओं की ओर से लगातार प्रयास किए गए हैं। कजान ब्रिक्स सम्मेलन में वार्ता और अगस्त 2025 में पीएम मोदी की चीन यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें बहाल की गईं। भारत ने चीनी व्यापार पेशेवरों के लिए वीजा नियमों में ढील दी, वहीं चीन ने तिब्बत में कैलाश मानसरोवर यात्रा को पुन: शुरू करने की अनुमति दी। इसके अलावा, अगस्त में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच बीजिंग में 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता हुई थी, जिसमें सीमा प्रबंधन और शांति बनाए रखने पर विस्तृत चर्चा हुई थी।

112 अरब डॉलर का रिकॉर्ड व्यापार घाटा

सीमा विवाद के अलावा, दोनों नेताओं की बातचीत में व्यापार संतुलन का मुद्दा प्रमुखता से उठेगा। वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत और चीन के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार 151 अरब डॉलर (लगभग $14.34$ लाख करोड़ रुपये) रहा। इसमें भारत का आयात 131 अरब डॉलर (लगभग $12.52$ लाख करोड़ रुपये) का था, जबकि निर्यात केवल 19 अरब डॉलर (लगभग $1.81$ लाख करोड़ रुपये) रहा। इससे भारत को 112 अरब डॉलर (लगभग $10.72$ लाख करोड़ रुपये) का भारी व्यापार घाटा सहना पड़ा है, जिसे कम करने के लिए भारत सख्त कदम उठाने की मांग कर सकता है।

ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध और वैश्विक रणनीतिक कारक

चीन द्वारा तिब्बत में अरुणाचल सीमा के पास ‘यारलुंग त्सांगपो’ (ब्रह्मपुत्र) नदी पर जुलाई 2025 से बनाई जा रही 60,000 मेगावाट क्षमता वाली ‘मेडोग जलविद्युत परियोजना’ को लेकर भी भारत अपनी चिंताएं व्यक्त करेगा। भारत इस परियोजना में पारदर्शिता और पर्यावरणीय डेटा साझा करने पर जोर दे रहा है। इसके साथ ही, अमेरिका की नई व्यापार व सख्त टैरिफ नीतियों के बीच दोनों देश रणनीतिक मतभेदों को दरकिनार कर व्यावहारिक संबंध बनाने के इच्छुक हैं। हालांकि, क्वाड (QUAD) गठबंधन को लेकर चीन का संदेह और चीन-पाकिस्तान की नजदीकियां भारत के लिए अब भी चिंता का विषय बनी हुई हैं।

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